“My Journey – An Unfinished Dream, In Sha Allah One Day It Will Come True”
मैंने अपनी शुरुआत बच्चों को पढ़ाने से की। स्कूल और अकैडमी में पढ़ाते-पढ़ाते मेरे दिल में एक ख़्वाब जन्मा। वह सिर्फ़ एक इमारत बनाने का ख़्वाब नहीं था, बल्कि एक ऐसी जगह बनाने का सपना था जहाँ बेटियाँ दीन और दुनिया—दोनों की बेहतरीन तालीम हासिल करें। जहाँ किसी बच्ची को कभी यह महसूस न हो कि उसे सीखने का कोई मौका नहीं मिला।
बड़ों की दुआओं, अपनी मेहनत और अल्लाह तआला के फ़ज़्ल से वह सपना धीरे-धीरे हक़ीक़त बनता गया। ऐसा लगने लगा कि मंज़िल अब दूर नहीं रही।
लेकिन शायद अल्लाह तआला की मर्ज़ी कुछ और थी।
फिर ज़िंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। हालात बदले, रिश्तों में दरारें आईं, और घर के विवादों ने मेरे उस ख़्वाब को मुझसे छीन लिया। आज भी वह स्कूल चल रहा है, लेकिन जिस नीयत, जिस मक़सद और जिस मोहब्बत से उसकी बुनियाद रखी थी, वह अब उसमें नज़र नहीं आती।
उस वक़्त बहुत लोगों ने कहा था, “अगर यह अपने मक़सद में कामयाब हो गया, तो बहुत आगे निकल जाएगा।”
शायद यही बात कुछ लोगों को मंज़ूर नहीं थी।
वह दौर मेरी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल दौर था। ऐसा लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। लेकिन मैंने अपने रब से उम्मीद नहीं छोड़ी। मैंने अपने दिल को समझाया कि हर दर्द के पीछे अल्लाह की कोई बेहतर हिकमत होती है।
आज मैं फिर से एक नए सफ़र पर हूँ।
मैं सीख रहा हूँ, मेहनत कर रहा हूँ, नए सपने बना रहा हूँ और हर दिन अपने आपको पहले से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूँ। मुझे पूरा यक़ीन है कि अगर नीयत साफ़ हो, मेहनत सच्ची हो और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर हो, तो कोई भी सपना हमेशा के लिए अधूरा नहीं रहता।
इंशाअल्लाह…
एक दिन फिर वही सपना हक़ीक़त बनेगा।
एक ऐसा तालीमी इदारा बनेगा जहाँ बेटियों को दीन, दुनिया, अख़लाक़, इल्म, टेक्नोलॉजी और ज़िंदगी की हर ज़रूरी तालीम मिलेगी। जहाँ हर बच्ची अपने ख़्वाब पूरे करने का हौसला लेकर निकलेगी।
आज मेरा सपना अधूरा है… लेकिन खत्म नहीं हुआ।
क्योंकि मुझे अपने रब के वादे पर यक़ीन है।
“कुछ सपने आँखों से नहीं, दिल की गहराइयों से देखे जाते हैं। अगर हालात उन्हें कुछ समय के लिए तोड़ भी दें, तब भी उनकी रौशनी उम्मीद, सब्र और हौसले को ज़िंदा रखती है। क्योंकि सच्चे ख़्वाब कभी मरते नहीं, वे सिर्फ़ अपने पूरे होने का सही वक़्त इंतज़ार करते हैं।”
“हो सकता है तुम किसी चीज़ को नापसंद करो, जबकि वही तुम्हारे लिए बेहतर हो। और हो सकता है तुम किसी चीज़ को पसंद करो, जबकि वही तुम्हारे लिए नुकसानदेह हो। अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।”
— सूरह अल-बक़रह (2:216)यह मेरी कहानी नहीं, मेरे सब्र, मेरी उम्मीद और मेरे रब पर भरोसे की कहानी है।
इंशाअल्लाह, एक दिन यह अधूरा ख़्वाब ज़रूर पूरा होगा। 🤲